खास बातें:
- ट्रंप के 50% टैरिफ के बाद भी भारतीय शेयर बाजार में कोई बड़ा क्रैश नहीं हुआ।
- विदेशी निवेशकों (FII) ने ₹15,950 करोड़ की बिकवाली की, लेकिन बाजार को असली सहारा कहीं और से मिला।
- जानिए कैसे घरेलू निवेशकों (DII) और SIP की ताकत ने बाजार को गिरने से बचा लिया।
नई दिल्ली:
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ लगाया, तो सबको लगा कि भारतीय शेयर बाजार में सुनामी आ जाएगी। शुक्रवार को बाजार गिरा भी, लेकिन यह एक मामूली गिरावट थी, क्रैश नहीं। हर कोई हैरान था कि विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली के बावजूद बाजार डूबा क्यों नहीं?
इसका जवाब एक दिलचस्प कहानी में छिपा है - एक तरफ थे बेचकर भागते FII, और दूसरी तरफ दीवार बनकर खड़े हमारे अपने घरेलू निवेशक (DII)। आइए समझते हैं कि यह पूरा खेल क्या था और DII ने बाजार को कैसे बचाया।
असली हीरो: DII और SIP का कमाल
जब ट्रंप के टैरिफ की खबर आई, तो विदेशी निवेशकों ने घबराकर भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त के पहले हफ्ते में ही FII ने ₹15,950 करोड़ के शेयर बेच डाले। इतनी बड़ी बिकवाली किसी भी बाजार को गिराने के लिए काफी होती है।
लेकिन तभी मैदान में उतरे असली हीरो - हमारे घरेलू संस्थागत निवेशक (DII), जिनमें म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां शामिल हैं।
जहाँ FII बेच रहे थे, वहीं DII खरीद रहे थे। DII ने उसी दौरान ₹29,070 करोड़ की रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी की, जो FII की बिकवाली से लगभग दोगुनी थी। इसी एक दांव ने बाजार का पूरा रुख पलट दिया और उसे गिरने से थाम लिया।
चॉइस वेल्थ के एक्सपर्ट आकाशत गर्ग के मुताबिक, इसका एक और बड़ा कारण है SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान)। आज भारत में हर महीने ₹25,000 करोड़ से ज्यादा का पैसा SIP के जरिए बाजार में आ रहा है। यह पैसा एक "ऑटोमैटिक स्टेबलाइजर" की तरह काम करता है और बाजार को एक सुरक्षा कवच देता है।
बाजार में क्यों नहीं आया Crash? 5 असली कारण
1. DII का मजबूत सहारा (The DII Wall): यह सबसे बड़ा कारण है। जब भी विदेशी निवेशक बेचते हैं, हमारे घरेलू फंड्स खरीदार बनकर सामने आ जाते हैं। यह दिखाता है कि उन्हें भारत की ग्रोथ स्टोरी पर कितना भरोसा है।
2. मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था (Internal Strength): भारत की अर्थव्यवस्था सिर्फ एक्सपोर्ट पर नहीं, बल्कि अपनी घरेलू मांग पर चलती है। हमारी GDP का 60% हिस्सा हमारी अपनी खपत से आता है। इसलिए, अमेरिकी टैरिफ से कुछ कंपनियों को नुकसान तो होगा, लेकिन पूरी अर्थव्यवस्था नहीं हिलेगी।
3. आम निवेशक की SIP पावर: जैसा कि ऊपर बताया गया है, SIP के जरिए आने वाला करोड़ों रुपये का फ्लो बाजार को एक स्थिर आधार देता है। यह आम भारतीय निवेशक की ताकत है जो बाजार को बड़े झटकों से बचाती है।
4. टैरिफ का सीमित असर: एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह टैरिफ एक स्थायी आर्थिक हमला नहीं, बल्कि एक अस्थायी "राजनीतिक कदम" है। बाजार को उम्मीद है कि जल्द ही बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलेगा और अंतिम टैरिफ 20% या उससे भी कम हो सकता है।
5. सरकार का सधा हुआ रुख: भारत सरकार ने इस मामले में घबराहट नहीं दिखाई, बल्कि एक सधा हुआ और आत्मविश्वास से भरा रुख अपनाया। इससे निवेशकों का भरोसा बना रहा कि सरकार किसी भी दबाव को संभालने में सक्षम है।
तो अगली बार जब कोई पूछे कि भारतीय बाजार क्यों नहीं गिरा, तो जवाब सिर्फ 'मजबूत अर्थव्यवस्था' नहीं है। असली जवाब है - आप और हम जैसे घरेलू निवेशक, हमारे DII और SIP की बढ़ती ताकत, जिसने विदेशी बिकवाली के तूफान को भी रोक लिया।
Disclaimer: यह कहानी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। उपरोक्त विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं। हम निवेशकों को कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से जांच करने की सलाह देते हैं।

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